कश्मीर मुद्दा : लगातार लग रहे झटके के बाद भी नहीं सुधर रहा पाकिस्तान 

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नई दिल्ली : कश्मीर मुद्दे पर लगातार मिल रहे झटके के बाद भी पाकिस्तान शांत बैठने को तैयार नहीं है। ताजा झटका उसके अपने ही तालिबान ने दिया है। अफगानिस्तान और कश्मीर मुद्दे को जोड़ने का विरोध करते हुए तालिबान के प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने कहा कि कश्मीर के मुद्दे को कुछ पक्षों की ओर से अफगानिस्तान से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है, जो कतई उचित नहीं है। मुजाहिद ने कहा कि कश्मीर संकट से निपटने में पाकिस्तान को तालिबान से कोई मदद नहीं मिलेगी, क्योंकि अफगानिस्तान के मुद्दे का इससे कोई लेना-देना नहीं है। इसके अलावा अफगानिस्तान अन्य देशों की प्रतिस्पर्धा के बीच फंसना नहीं चाहता।’
अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई ने भी पाकिस्तान को नसीहत देते हुए कहा कि वह क्षेत्र में अस्थिरता फैलाने के लिए हिंसा का इस्तेमाल न करे। करजई ने कहा, ‘अफगानिस्तान की शांति प्रक्रिया को कश्मीर में अपने उद्देश्य से जोड़नाf यह बताता है कि पाकिस्तान अफगानिस्तान को महज एक रणनीतिक उपकरण के तौर पर देखता है। मैं पाकिस्तान सरकार से कहना चाहता हूं कि वह क्षेत्र में हिंसा को अपने हथियार के तौर पर इस्तेमाल करना बंद करे। हम उम्मीद करते हैं कि जम्मू-कश्मीर को लेकर मोदी सरकार का फैसला राज्य और भारत के लोगों की बेहतरी वाला साबित होगा।’
जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को खत्म करने के बाद से पाकिस्तान की बौखलाहट बढ़ती जा रही है। उधर, संयुक्त राष्ट्र ने भी कश्मीर के मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है। उसने पाकिस्तान को नसीहत देते हुए उसे शिमला समझौते की याद दिलाई।
इधर, अमेरिका ने कहा कि कश्मीर पर उसकी नीति में कोई बदलाव नहीं आया है।वउसने दोनों देशों से शांति और संयम बरतने की अपील की है। अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र से झटका मिलने के बाद पाकिस्तान विश्व समुदाय में अलग-थलग पड़ता जा रहा है।
अमेरिका और यूएनओ का साथ न मिलने पर पाकिस्तान के विदेश मंत्री शुक्रवार को आनन-फानन में चीन जा पहुंचे। लेकिन वहां से भी पाकिस्तान को मनमाफिक सहयोग नहीं मिला। चीन ने भी दोनों देशों को संवाद और बातचीत के जरिये विवादों को सुलझाने की सलाह दी है। रही-सही तालिबान ने पूरी कर दी। उसने कश्मीर मसले की तुलना अफगानिस्तान से करने पर पाकिस्तान की आलोचना की है।
जम्मू-कश्मीर को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ती तलखी को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटारेस ने दोनों देशों से इस मुद्दे पर अधिकतम संयम बरतने की अपील की है। साथ ही गुटारेस ने पाकिस्तान को नई दिल्ली और इस्लामाबाद के बीच 1972 में हुई शिमला समझौते की याद दिलाई, जिसमें कश्मीर में तीसरे पक्ष की मध्यस्थता से इनकार किया गया है।
इस समझौते में कहा गया है कि जम्मू-कश्मीर की अंतिम स्थिति पर संयुक्त राष्ट्र के चार्टर के अनुसार शांतिपूर्ण तरीकों से निर्णय लिया जाएगा। गुटारेस ने शिमला समझौते को याद दिलाते हुए कहा कि कश्मीर भारत और पाकिस्तान के बीच एक द्विपक्षीय मुद्दा है।ूं इसमें तीसरे पक्ष की मध्यस्थता की जरूरत नहीं है। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म होने के बाद पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव से उचित भूमिका निभाने के लिए आग्रह किया था।
यूएन से पाकिस्तान को मिले झटके बाद अमेरिका ने इस्लामाबाद को नसीहत दी है। विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मोर्गन ओर्टागस से संवाददाताओं ने पूछा कि क्या अमेरिका की कश्मीर नीति में कोई बदलाव आया है? इसके जवाब में ओर्टागस ने कहा, ‘अमेरिका की नीति यह रही है कि कश्मीर भारत और पाकिस्तान के बीच एक द्विपक्षीय मुद्दा है और दोनों देशों को ही इस मुद्दे पर बातचीत की गति और गुंजाइश को लेकर फैसला करना है।
अगर नीति में कोई बदलाव हुआ तो निश्चित तौर पर मैं इसकी घोषणा करूंगी, लेकिन ऐसा नहीं है।’ साथ ही उन्होंने कहा कि अमेरिका कश्मीर को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच वार्ता का समर्थन करता है। हमने सभी पक्षों से शांति और संयम बरतने की अपील की है।

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