उन्नाव दुष्कर्म कांड : सुप्रीम कोर्ट ने दिल्‍ली ट्रांसफर किए सभी केस, लोअर कोर्ट 45 दिनों में पूरी करे सुनवाई

0
95
नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने उन्नाव के बहुचर्चित दुष्कर्म मामले में सख्त रुख अपनाते हुए उससे जुड़े सभी मामलों को लखनऊ से दिल्‍ली ट्रांसफर करने का आदेश दे दिया है। साथ ही लोअर कोर्ट को प्रतिदिन सुनवाई कर 45 दिनों के अंदर सुनवाई पूरी करने का निर्देश दिया है। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने उत्‍तर प्रदेश सरकार को पीड़िता को 25 लाख रुपये का मुआवजा देने, सीआरपीएफ को तत्काल प्रभाव से पीड़ित परिवार के सदस्यों को सुरक्षा मुहैया कराने का आदेश दिया है। कोर्ट ने इससे पहले सीबीआई को सात दिनों में हादसे की जांच पूरी करने के लिए कहा है। सुप्रीम कोर्ट ने दोपहर बाद दो बजे तक पीड़िता की मेडिकल रिपोर्ट मांगी है, ताकि पीड़िता यदि एयरलिफ्ट करने की हालत में हो तो उसे दिल्ली के एम्स में भर्ती कराई जा सके। वहीं, मुख्‍य न्‍यायाधीश रंजन गोगोई ने पीड़िता की मां की लिखी चिट्ठी का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि वह चिट्ठी मुझ तक क्यों नहीं पहुंची? उधर, भारी फजीहत के बाद भारतीय जनता पार्टी ने उन्नाव के बांगरमऊ से विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को पार्टी से बर्खास्त कर दिया है। भाजपा उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह को दिल्ली तलब किया गया था। इसी के बाद लग रहा था कि सेंगर पर बड़ी कार्रवाई हो सकती है।
उन्नाव दुष्कर्म मामले की आज गुरुवार को सुनवाई शुरू हुई। कोर्ट ने सबसे पहले सीआरपीएफ को तत्काल प्रभाव से पीड़ित परिवार के सदस्यों को सुरक्षा मुहैया कराने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि पीड़िता के परिवार के अलावा उन्‍नाव में रह रहे उनके सभी संबंधियों को सुरक्षा उपलब्‍ध कराई जाए। इसके बाद कोर्ट ने उन्‍नाव दुष्‍कर्म और इससे जुड़े सभी मामलों की रोजाना सुनवाई करने का आदेश निचली अदालत को दिया है, ताकि पीड़िता को जल्‍द से जल्‍द न्‍याय मिल सके। इन आदेशों के अलावा सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को 25 लाख रुपये बतौर मुआवजा पीड़िता को देने का निर्देश भी दिया है।
सुप्रीम कोर्ट में दोपहर बाद दो बजे एक बार फिर इस मामले की सुनवाई शुरू हुई, तो उत्तर प्रदेश के उन्‍नाव दुष्‍कर्म और एक्‍सीडेंट से जुड़े सभी केस सुप्रीम कोर्ट ने लखनऊ से दिल्‍ली ट्रांसफर करने का आदेश दिया।
इससे पहले उन्‍नाव दुष्कर्म मामले की सुनवाई दोपहर 12 बजे जब फिर से शुरू हुई, तब सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि पहला केस लड़की के दुष्‍कर्म से जुड़ा था, जिसमें चार्जशीट फाइल की जा चुकी है और विधायक और अन्‍य आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है।
सीबीआई ने बताया कि दूसरा केस उन्‍नाव दुष्‍कर्म पीड़िता के पिता पर आर्म्‍स एक्‍ट के तहत दर्ज कराया गया था, जिसे झूठा पाया गया।
सुप्रीम कोर्ट को सीबीआई ने बताया कि तीसरा केस दुष्‍कर्म पीड़िता की मां ने दर्ज कराया था, जिसमें शिकायत की गई थी कि उनके पिता की पुलिस कस्‍टडी में मौत हो गई है।
इस पर नाराजगी जताते हुए न्‍यायाधीश ने सीबीआई निदेशक से पूछा कि इन मामलों की जांच के लिए आपको कितना समय चाहिए? इस पर सीबीआई निदेशक ने सभी मामलों की जांच के लिए एक महीने का समय मांगा, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई के निदेशक की मांग को ठुकराते हुए सभी मामलों की जांच सात दिनों के अंदर पूरा करने के आदेश दिए।

बाद में कोर्ट ने इसे पन्द्रह दिनों में पूरा करने के आदेश दिए।

इस बीच

चीफ जस्टिस के सामने चिट्ठी पेश करने में हुई देरी का स्पष्टीकरण देते हुए सेक्रेटरी जनरल ने कोर्ट को बताया कि सुप्रीम कोर्ट में हर महीने 5800 चिट्ठियाँ आती हैं। इस महीने 6900 चिट्ठियाँ आई हैं, जिसमें एक पीड़िता की थी, लेकिन उन्हें पीड़िता का नाम नहीं मालूम था। सेक्रेटरी जनरल ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के 1988 के फैसले के मुताबिक चिट्ठियों की जाँच चल रही थी और जब इस चिट्ठी के बारे में पता चला तो 30 जुलाई को सीजेआई के सामने पेश की गई। कोर्ट ने कहा कि वह इस मुद्दे पर भी आदेश देगा।
सुप्रीम कोर्ट ने उन्नाव केस में सीबीआई निदेशक से आज 12 बजे तक जाँच की प्रगति रिपोर्ट माँगी है। कोर्ट ने यह भी कहा कि वह उन्नाव दुष्कर्म और अन्य घटनाओं के केस भी उत्तर प्रदेश से बाहर ट्रांसफ़र करने के इच्छुक हैं। सुप्रीम कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि वह इस बारे में सीबीआई डायरेक्टर से बात कर बताएं। इस पर सॉलिसिटर जनरल दोबारा सुप्रीम कोर्ट आए और कोर्ट को बताया कि उनकी अभी-अभी सीबीआई डायरेक्टर से बात हुई है। निदेशक का कहना है कि केस की जाँच लखनऊ में चल रही है

,

इसलिए रिकॉर्ड वहीं हैं, जैसे ही पहली फ़्लाइट मिलेगी रिकार्ड दिल्ली लाए जाएंगे।
सॉलिसिटर जनरल ने सुप्रीम कोर्ट से मामला कल शुक्रवार सुनने का आग्रह किया, लेकिन कोर्ट इसके लिए राज़ी नहीं हुआ। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि डायरेक्टर सीबीआई जाँच अधिकारी से जांच की प्रगति की रिपोर्ट पता करके कोर्ट को आज ही बताएं। सुनवाई के बीच उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उन्नाव दुर्घटना मामले की जाँच भी सीबीआई को सौंप दी गई है।

,