…और बहुत बड़े फिनिशर के कारण हम सेमीफाइनल हार गए

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आईसीसी वर्ल्ड कप 2019 का पहला सेमीफाइनल न्यूजीलैंड ने नहीं जीता, बल्कि भारत हार गया। पूरी टीम इंडिया हाराकीरी करती हुई नज़र आई। एक रवींद्र जडेजा को छोड़ दें तो टीम के सभी बल्लेबाज अपनी साख के अनुरूप बैटिंग नहीं कर सके। दोनों ओपनर रोहित शर्मा और केएल राहुल एक-एक रन बनाकर आउट हो गए, जबकि विश्व का नंबर एक बल्लेबाज विराट कोहली भी उस एक रन के आंकड़े को पार नहीं कर पाया। टीम इंडिया इन तीनों के आउट होने तक महज पांच रन ही बना सकी थी। दिनेश कार्तिक भी आए और छह रन बनाकर चल दिए। मानो उन्हें अब क्रिकेट खेलना ही नहीं हो। ऋषभ पंत पिछले हर मैच में जो करते आए थे, वही इस मैच में किया। शुरुआत में टिकने के बाद आउट होकर चल दिए। ऐसे विकेटकीपर बल्लेबाज किस काम के। हर मैच में जमने के बाद अपने स्कोर को पचास और सौ में तब्दील करने के बजाय आउट होकर पवेलियन लौट जाना कहां तक उचित है। हार्दिक पांड्या को उनका स्वाभाविक खेल खेलने नहीं दिया गया। धोनी के आने के बाद वह काफी हद तक डिफेंसिव हो गए और आउट होकर मैदान से बाहर हो गए। यदि हार्दिक ने अपना स्वाभाविक खेल खेला होता तो हो सकता था मैच का कुछ दूसरा रुख होता। इस मैच के शुरू के बल्लेबाजों ने जो किया वह तो कतई उचित नहीं था, लेकिन सबसे बड़े मैच फिनिशर महेंद्र सिंह धोनी ने जो किया, वह तो और भी उचित नहीं था। न तो वह खेल रोटेट कर पा रहे थे और न ही चौके-छक्के लगा पा रहे थे। इनके अलावा लगातार डॉट बॉल खेलकर रिक्वायर रन रेट बढ़ाए जा रहे थे। ऐसा नहीं था कि गेंदे कम थीं, लेकिन जब आप वन-डे मैच की जरूरत के हिसाब से बल्लेबाजी नहीं करेंगे तो आपके क्रीच पर होने का क्या मतलब? वह न तो एक रन लेकर जडेजा को खेलने दे रहे थे और न ही खुद रन बना रहे थे। रवींद्र जडेजा को देखकर भी कुछ कर गुजरने की उनकी हिम्मत नहीं हुई। आखिरकार रवींद्र जडेजा के आउट होने के बाद वह भी अजीबोगरीब तरीके से रन आउट होकर मैदान से बाहर चले गए। इस मैच में धोनी न तो खुद जरूरत के मुताबिक खेले और न ही हार्दिक पांड्या को खेलने दिया। धोनी ने न तो बल्लेबाजी रोटेट कर रवींद्र जडेजा को ज्यादा खेलने का मौका दिया और न ही खुद कुछ करते नज़र आए। बस ठुक-ठुक करते रहे। जब भी बल्लेबाजी करने आए, हर बार दो-तीन गेंदें खराब कीं। धोनी ने इस सेमीफाइनल में जितनी गेंदें बर्बाद की हैं, यदि उन गेंदों पर एक-एक रन भी ले लिया होता तो भारत यह मैच जीत गया होता। धोनी ने अपने पचास रन बनाने के लिए 72 गेंदों का सामना किया था। यदि इन 72 गेंदों पर धोनी ने 72 रन बना दिए होते तो हम फाइनल में होते, जबकि इनके सामने ही बैटिंग करने वाले रवींद्र जडेजा ने 59 गेंद पर शानदार 77 रन की पारी खेल दी। यानी एक बहुत बड़े मैच फिनिशर के कारण हम आईसीसी वर्ल्ड कप 2019 का फाइनल खेलने से वंचित रह गए।