तिरहुत के बच्चों पर रहम करो भगवान!

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मुजफ्फरपुर और आसपास के जिलों में एइएस ने अब तक सौ से अधिक बच्चों की जान ले ली है। पिछले कई सालों से यह बीमारी मुजफ्फरपुर में कहर बरपा रही है, जबकि नीतीश कुमार भी पिछले कई सालों से बिहार पर राज कर रहे हैं, पर नीतीश सरकार एइएस पर काबू पाने के लिए कुछ करती हुई नहीं दिखाई दे रही है। मुजफ्फरपुर के हालात फिलहाल कुछ वैसे ही नज़र आ रहे हैं, जैसे वर्ष 2018 से पहले उत्तर प्रदेश के गोरखपुर और उसके पास के जिलों की थी। तब गोरखपुर और उसके आसपास के जिलों में एइएस से हर साल सैकड़ों बच्चे मरते थे। अखिलेश सरकार एइएस को कंट्रोल करने में नाकाम रही थी। वर्ष 2017 में भाजपा की सरकार बनी। योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बने। उस साल भी एइएस ने कहर बरपाया। राजनीति करने वालों ने योगी सरकार की खूब खिंचाई की। उन्होंने यह भी नहीं देखा कि पिछली अखिलेश सरकार में इस बीमारी की क्या स्थिति थी? भाजपा की सरकार बनने से खुन्नस खाए लोग योगी सरकार को कोसने में कोई कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने यह भी नहीं देखी कि योगी सरकार अभी-अभी बनी है। राजनीतिक विरोधियों की थूका-फजीहत को योगी सरकार ने चुनौती के तौर पर लिया और इस बीमारी की रोकथाम के लिए जरूरी कदम उठाए। आज गोरखपुर और उसके आसपास के जिलों में एइएस का कोई खौफ नहीं है। योगी सरकार ने एइएस पर पूरी तरह से काबू पा लिया है, जबकि राजनीतिक विरोधी अब चुप हैं।

उधर, बिहार के मुजफ्फरपुर के हालात साल-दर-साल बदतर होते जा रहे हैं। हर साल एइएस बीमारी जिस तरह से कहर बरपा रही है, उससे यही लगता है कि यह अब नियंत्रण से बाहर हो गई है। पिछले कई सालों से मुजफ्फरपुर की यही स्थिति है और नीतीश सरकार भी कुछ करती हुई नहीं दिख रही है। हालांकि वह मृत बच्चों के परिजनों को चार-चार लाख की सहायता राशि दे रहे हैं, पर सबकुछ पैसा नहीं है। क्या पैसों से सूनी हो रहीं गोद भर जाएंगी? नहीं न। जब तक स्वास्थ्य व्यवस्था दुरूस्त नहीं होंगी, तब तक ऊपर वाले के भरोसे ही लोगों को जीना पड़ेगा। यानी बिहार में सबकुछ भगवान भरोसे है। देखते हैं भगवान कब तिरहुत क्षेत्र के बच्चों पर रहम करते हैं?