बिहार में महागठबंधन की केमिस्ट्री ध्वस्त, कांग्रेस छोड़ सभी को ‘जीरो’  

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पटना : बिहार में महागठबंधन की सारी केमिस्ट्री ध्वस्त हो गई है। उसे 40 में से सिर्फ एक सीट मिली है। इस चुनाव में लालू के राजद, उपेंद्र कुशवाहा की रालोसपा, जीतनराम माझी के हम और तथाकथित सन ऑफ मल्लाह मुकेश सहनी की वीआईपी पार्टी का खाता भी नहीं खुला है। इन सभी दलों को जीरो हाथ लगा है। केवल किशनगंज सीट पर महागठबंधन में शामिल कांग्रेस ने जीत दर्ज कर सकी है। राजनीतिक पंडितों ने एनडीए की इस जीत को राष्ट्रवाद और विकास की जीत करार दिया है।
बिहार में लोकसभा चुनाव के परिणामों में आई ‘मोदी सुनामी’ बिहार में भी जमकर चली। नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार ने एक साथ मिलकर बिहार में महागठबंधन की सोशल इंजिनियरिंग को ध्वस्त कर दिया। बीजेपी की अगुवाई में एनडीए ने बिहार की 40 सीटों में से 39 सीटों पर जीत दर्ज कर राजद, हम, रालोसपा और वीआईपी का सूपड़ा साफ कर दिया।
बिहार की कुल 40 सीटों में से आरजेडी ने 19 सीटों पर जबकि कांग्रेस ने 9 सीटों पर चुनाव लड़ा था। इनके अलावा उपेंद्र कुशवाहा की आरएलएसपी ने पांच सीटों पर और जीतनराम मांझी की अगुवाई वाली हम (एस) व मुकेश साहनी की अगुवाई वाली वीआईपी ने तीन-तीन सीटों पर प्रत्याशी उतारे थे। महागठबंधन ने आरा लोकसभा की एकमात्र सीट सीपीआई (एमएल) के लिए छोड़ दिया था, जहां पर भी उसे हार ही मिली है। बिहार की सभी 40 सीटों में से मात्र मुस्लिम बहुल किशनगंज सीट पर कांग्रेस को जीत मिली है। वहीं बिहार में विजेता बनकर उभरी एनडीए की तरफ से बीजेपी और जेडी (यू) ने 17-17, जबकि लोजपा ने छह सीटों पर चुनाव लड़ा था। इनमें से भाजपा और लोजपा ने सौ फीसद जीत यानी 17 और छह सीटों पर जीत दर्ज की है, जबकि जदयू ने 16 सीटों पर विजयश्री हासिल की है।
बात अगर 2014 में हुए लोकसभा चुनावों की करें तो बीजेपी और एलजेपी की एनडीए ने 31 सीटें जीती थीं, जबकि आरजेडी-कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन के खाते में 7 सीटें आई थीं। वहीं चुनाव मैदान में अकेले उतरी जेडी (यू) को मात्र दो सीटों से संतोष करना पड़ा था।
एनडीए गठबंधन को बिहार में मिली ऐतिहासिक जीत के बाद बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने वहां की जनता का धन्यवाद किया तथा कहा कि हमने केंद्र में नरेंद्र मोदी और प्रदेश में हम अपने विकास कार्यों पर वोट मांगा था। बिहार की जनता ने जिस तरह से हमारे गठबंधन को वोट दिया है, उससे हमारी जिम्मेदारी और भी बढ़ गई है। हम बिहार के विकास के लिए काम जारी रखेंगे।
केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार में शामिल होने के सवाल पर नीतीश ने कहा, ‘यह सरकार चला रहे लोगों के विवेक पर निर्भर करता है कि वे कैबिनेट में किसको शामिल करना चाहते हैं। इसमें कुछ भी गलत नहीं है।’
राजनीतिक विश्लेषकों ने इसे राष्ट्रवाद और विकास की जीत करार दिया है।