गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर का निधन, देशभर में राष्ट्रीय शोक

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पणजी : गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर का रविवार को लम्बी बीमारी के बाद निधन हो गया। वह पिछले कई वर्षों से पैन्क्रियाज कैंसर से पीड़ित थे। वह 63 वर्ष के थे। पर्रिकर की हालत पिछले दो दिनों से बेहद खराब थी। रविवार को उनकी स्थिति और नाजुक हो गई थी। इसके बाद दोना पाउला स्थित उनके निजी आवास पर डॉक्टरों की टीम ने उनके स्वास्थ्य को संभालने का प्रयास किया, लेकिन रात 8 बजे के करीब उनका निधन हो गया। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने ट्वीट कर उनके निधन की जानकारी पूरे देश को दी। पर्रिकर के निधन पर केंद्र सरकार ने 18 मार्च को राष्ट्रीय शोक की घोषणा की है। इस दौरान देश की राजधानी के साथ राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की राजधानियों में राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा। उधर, मनोहर पर्रिकर के निधन के बाद गोवा में 18 से 24 मार्च तक सात दिनों का राजकीय शोक घोषित किया गया। इस दौरान पूरे गोवा में राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा।

गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर के निधन पर शोक जताने के लिए सोमवार की सुबह दस बजे केंद्रीय मंत्रिमंडल की विशेष बैठक होगी। सूत्रों ने बताया कि पर्रिकर की याद में दो मिनट का मौन रखा जाएगा। साथ ही जन प्रतिनिधि के रूप में उनके योगदान की प्रशंसा में एक प्रस्ताव भी पारित किया जाएगा।

गोवा में सोमवार को स्‍कूल कॉलेज बंद रहेंगे। मनोहर पर्रिकर का पार्थिव शरीर सोमवार सुबह 9.30 से 10.30 बजे तक पणजी में भाजपा हेडक्वार्टर में रखा जाएगा। उसके बाद 10.30 बजे कला अकादमी ले जाया जाएगा। पूर्वाह्न 11 बजे से शाम 4 बजे तक आम जनता मनोहर पर्रिकर को श्रद्धांजलि दे सकेंगे। शाम 5 बजे मनोहर पर्रिकर का अंतिम संस्कार किया जाएगा। पर्रिकर की अंतिम यात्रा में गृहमंत्री राजनाथ सिंह शामिल होंगे।
इससे पहले गोवा में चल रहे सियासी संकट के बीच रविवार देर शाम मुख्यमंत्री कार्यालय ने ट्वीट के जरिए पर्रिकर की हालत बेहद नाजुक होने की पुष्टि की थी। इसी दौरान मुख्यमंत्री के निजी आवास पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिए जाने के बाद उनके रिश्तेदार, बहुत सारे वरिष्ठ सरकारी अधिकारी और राजनीतिक नेताओं के वहां पहुंचने से किसी अप्रिय समाचार के सामने आने की अटकलें लगने लगी थीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पर्रिकर के निधन पर शोक जताते हुए कहा कि वह अद्वितीय नेता, सच्चे देशभक्त और असाधारण प्रशासक थे।

शनिवार को भी उनकी हालत नाजुक होने की सूचना सामने आई थी, लेकिन तब मुख्यमंत्री कार्यालय की तरफ से कहा गया था कि उनका स्वास्थ्य स्थिर बना हुआ है। बाद में उनसे मिलने पहुंचे राज्य सरकार में भाजपा के सहयोगी छह विधायकों के दल में मौजूद गोवा फॉरवर्ड पार्टी के अध्यक्ष विजय सरदेसाई ने भी मुलाकात के बाद कहा था कि मुख्यमंत्री की हालत बेहद खराब है। इसके बाद शनिवार शाम को राज्य भाजपा कोर कमेटी ने अपने सभी विधायकों के कुछ दिनों तक गोवा से बाहर जाने पर रोक लगा दी थी। मणिपुर की राज्यपाल नजमा हेपतुल्ला, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत कई बड़ी हस्तियों ने ट्वीट करके पर्रिकर के निधन पर दुख जताया है।
बता दें कि पिछले कई सालों से बीमार पर्रिकर पिछले साल इलाज के लिए अमेरिका भी गए थे, लेकिन वहां से वापस लौटने पर भी स्थिति में सुधार नहीं हुआ। इसके बाद उन्हें लंबे समय तक एम्स दिल्ली में रखा गया था। बाद में वह एम्स से गोवा स्थित अपने निजी आवास पर शिफ्ट हो गए थे। पिछले महीने भी पर्रिकर का गोवा मेडिकल कॉलेज (जीएमसीएच) में एक ऑपरेशन किया गया था, लेकिन उनकी हालत लगातार बिगड़ रही थी। यहां तक कि उन्होंने राज्य का बजट भी नाक में नली लगाकर पेश किया था।
गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर भारत के रक्षा मंत्री भी रह चुके थे। पर्रिकर का जन्म 13 दिसंबर 1955 को गोवा के मापुसा में हुआ था। वह भारत के किसी भी राज्य के पहले ऐसे मुख्यमंत्री थे, जो आईआईटी से स्नातक थे। 1978 में उन्होंने आईआईटी मुंबई से स्नातक किया था। साल 2001 में आईआईटी मुंबई ने उन्हें विशिष्ट भूतपूर्व छात्र की उपाधि भी दी थी। भारतीय जनता पार्टी से गोवा के मुख्यमंत्री बनने वाले वह पहले नेता थे। 13 मार्च 2017 को पर्रिकर ने चौथी बार गोवा के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी।जून 1999 से नवंबर 1999 तक वह विरोधी पार्टी के नेता रहे। 24 अक्टूबर 2000 को वह गोवा के मुख्यमंत्री बने, लेकिन उनकी सरकार फरवरी 2002 तक ही चल पाई। जून 2002 में वह फिर सभा के सदस्य बने और पांच जून 2002 को फिर गोवा के मुख्यमंत्री के लिए चयनित हुए। भाजपा को गोवा की सत्ता में लाने का श्रेय परिकर को ही जाता है।