कर्नाटक में हाईवोल्टेज ड्रामा, सत्ता कब्जाने को शह-मात का खेल शुरू

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नई दिल्ली/बेंगलुरु : कर्नाटक विधानसभा चुनाव परिणाम आने के बाद वहां पर हाई वोल्टेज ड्रामा शुरू हो गया है। इस चुनाव में 104 सीट जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी भाजपा को सत्ता से दूर रखने के लिए कांग्रेस (78) ने बिना शर्त जेडीएस (38) को समर्थन दे दिया है। जेडीएस के कुमार स्वामी ने कांग्रेस के समर्थन से सरकार बनाने का दावा पेश करने के लिए जैैैैसे ही राज्यपाल से शाम 5.30 बजे का समय मांगा, भाजपा के मुख्यमंत्री पद के दावेदार येदियुरप्पा ने पांच बजे ही राज्यपाल से मिलकर अपनी दावेदारी पेेेश कर दी। सत्ता पर काबिज होने के लिए दोनों ओर से शह और मात का खेल जारी है। अब गेंद पूरी तरह से राज्यपाल के पाले मेें हैैै। उनके विवेक पर ही सबकुछ निर्भर है। देखना है कर्नाटक में अगली सरकार किसकी बनती है।

देश के दक्षिणी राज्यों में सत्ता का विजयरथ दौड़ाने के लिए जोर लगा रही भाजपा कर्नाटक विधानसभा चुनाव में सत्ता के ‘प्रवेश द्वार’ तक पहुंच कर ठिठक गई है। राज्य विधानसभा चुनावों के मंगलवार को घोषित नतीजों में भाजपा 104 सीट जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। हालांकि वह बहुमत का जादुई आंकड़ा हासिल नहीं कर सकी है। देर रात आए नतीजों में भाजपा को 104, कांग्रेस को 78, जदएस को 38 और अन्य को दो सीटें मिली हैं।प्रदेश की सत्ता की दौड़ में पिछड़ी कांग्रेस ने भाजपा को सरकार बनाने से दूर रखने के मिशन पर कार्य करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा की पार्टी जदएस को समर्थन देने का एेलान कर दिया और देवगौड़ा के पुत्र एचडी कुमारस्वामी को मुख्यमंत्री बनने का प्रस्ताव रख दिया। इसे जदएस ने बिना देर किए स्वीकार भी कर लिया। कुमारस्वामी ने तत्परता दिखाते हुए राज्यपाल वजूभाई वाला को पत्र लिखकर सूचित किया कि उन्होंने सरकार बनाने के लिए कांग्रेस का समर्थन स्वीकार कर लिया है।

बाद में वह कांग्रेसी नेताओं के साथ राज्यपाल से मिलने भी पहुंचे। लेकिन दोनों पार्टियों के मिलकर सरकार बनाने की तैयारी में पेंच फंस गया। कांग्रेस के कुछ लिंगायत विधायकों ने कुमारस्वामी को मुख्यमंत्री बनाए जाने का विरोध कर दिया। खबर यह भी आ रही है कि कांग्रेस अपने विधायकों को पार्टी छोड़ने के डर से आंध्र प्रदेश या पंजाब भेजने की योजना बना रही है। दूसरी ओर, भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार बीएस येदियुरप्पा भी सरकार बनाने का दावा करने के लिए शाम पांच बजे राज्यपाल से मिलने पहुंच गए। उनका कहना है कि सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते सरकार बनाने का पहला मौका भाजपा को मिलना चाहिए।

पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने स्थिति संभालने के लिए दिल्ली से तीन वरिष्ठ नेताओं जेपी नड्डा, धर्मेंद्र प्रधान और प्रकाश जावड़ेकर को बेंगलुरु भेजा है। इस तरह अब सबकी नजरें राज्यपाल के रुख पर हैं। सूत्रों ने बताया है कि राज्यपाल आधिकारिक तौर पर पूरे नतीजे घोषित होने के बाद ही अागे कोई निर्णय लेंगे।

इससे पूर्व निवर्तमान मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने दो सीटों से चुनाव लड़ा था। वह बादामी सीट से तो जीत गए, लेकिन अपनी परंपरागत सीट चामुंडेश्वरी से भारी अंतर से हार गए। इसी तरह उनके करीबी सहयोगी एचसी महादेवप्पा भी नरसीपुरा से हार गए। दोनों को जदएस के प्रत्याशियों ने पराजित किया। चुनाव हारने वाले आठ अन्य मंत्रियों में रामनाथ राय, एच. अंजनेया, डॉ. शरन प्रकाश रुद्रप्पा पाटिल, एसएस मल्लिकार्जुन, कागोदू थिमप्पा, बसवराज रायरेड्डी, रुद्रप्पा लमानी और प्रमोद मध्वराज शामिल हैं। इन सभी को भाजपा उम्मीदवारों ने शिकस्त दी।

इस बीच भाजपा अध्य अमित शाह फिलहाल पूरी स्थिति पर अपनी नजर रखे हुए हैं। उन्होंने कहा कि बाकी देश की तरह कर्नाटक की महान भूमि ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ, पारदर्शी और विकासोन्मुख शासन पर दृढ़ विश्वास व्यक्त किया है। इस जनादेश से साफ है कि कर्नाटक ने कांग्रेस के भ्रष्टाचार, वंशवादी राजनीति और विभाजनकारी जातिवाद को खारिज कर दिया है। उधर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कर्नाटक में सबसे बड़ी पार्टी बनने पर वहां की जनता काे धन्यवाद दिया है, जबकि राहुल गांधी ने भी कांग्रेस को वोट देनेे वालों को धन्यवाद देते हुए जनता के समर्थन की सराहना की है।

कर्नाटक विधानसभा : दलीय स्थिति

कुल सीटें : 224

चुनाव हुए : 222

बहुमत का अांकड़ा : 112

भाजपा : 104

कांग्रेस : 78

जदएस + : 38

अन्य : 02

सरकार गठन का संभावित गणित :

कांग्रेस + जदएस+ : 116

भाजपा : 104 (8 की जरूरत, कहां से आएंगे स्थिति स्पष्ट नहीं)