फर्जी जमानती गैंग का साथी निकला मुजफ्फरपुर केवि टीचर

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मेरठ/मुज़फ़्फ़रपुर : बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर के गन्नीपुर स्थित केंद्रीय विद्यालय में कार्यरत शिक्षक मदनमोहन ठाकुर फर्जी जमानती गैंग का साथी निकला है। मेरठ कोर्ट में चल रहे एक मामले में उसने अपनी जमानत के लिए सितंबर 2014 में अपने जान-पहचान के जिस व्यक्ति को दो जमानतदार उपलब्ध कराने के लिए कहा था तथा उसके द्वारा उपलब्ध जमानतदारों को कोर्ट में पेश कर उसने अपनी जमानत कराई थी, वह वर्ष 2009 में ही जमानत के फर्जी कागजात तैयार कराने तथा फर्जी दोनों जमानतदारों को पहचानने से इनकार करते हुए दोनों को ही अपनेजमानतदार उपलब्ध कराने के मामले में अपने नौ साथियों के साथ जेल की हवा खा चुका है।
मेरठ के कई समाचार पत्रों में काम कर चुके एक वरिष्ठ पत्रकार ने मुज़फ़्फ़रपुर के गन्नीपुर स्थित केंद्रीय विद्यालय में कार्यरत शिक्षक मदनमोहन ठाकुर के खिलाफ नवंबर 2014 में एक वाद मेरठ स्थित एसीजेएम कोर्ट में दायर किया था। सीआरपीसी की धारा 420, 406 के तहत दर्ज इस मामले में जमानत के लिए आरोपी मदनमोहन ठाकुर इलाहाबाद हाईकोर्ट चला गया तथा वहां से एक ही दिन में जमानत दे देने का आदेश लेकर मेरठ आ गया। यहां उसने अपने जान-पहचान के ब्रजपाल पुत्र रामशरण निवासी 79, जवाहर नगर, थाना कंकरखेड़ा, मेरठ से संपर्क किया तथा अपनी जमानत के लिए दो जमानतदार उपलब्ध कराने के लिए कहा। इस पर उसके जान-पहचान के ब्रजपाल ने उसकी जमानत के लिए दो जमानतदार उपलब्ध करा दिए। इन दोनों जमानतदारों के जमानत लेने पर एसीजेएम-5 कोर्ट ने 15 सितंबर 2014 को आरोपी शिक्षक मदनमोहन ठाकुर को जमानत दे दी।
आरोपी मदनमोहन ठाकुर को जमानत मिल जाने की जानकारी जब इस वाद के वादी वरिष्ठ पत्रकार को हुई तो उसने जमानत में लगे कागज़ातों की पड़ताल की तो पता चला कि दोनों जमानतदारों बलदेव पुत्र ओमपाल निवासी गांव समयपुर, थाना मुंडाली, जिला मेरठ और जयप्रकाश पुत्र धनीराम निवासी

गांव फफूंड़ा, जिला मेरठ के नाम से कोर्ट में जमा किए गए ज़मीन के फर्द और वोटर आईडी फर्जी निकले। निर्वाचन कार्यालय ने दोनों की वोटर आईडी को अपने यहां से जारी होने से इनकार किया है। इसके अलावा दोनों जमानतदारों की ज़मीन के फर्द में दर्ज ख़ाता संख्या देकर मेरठ तहसील से नये फर्द निकलवाए गए तो वे दोनों फर्द भी फर्जी निकले। इन सबके अलावा गांव समयपुर और गांव फफूंडा के प्रधान ने भी दोनों जमानतदारों को पहचानने से इनकार करते हुए दोनों को ही अपने-अपने गांव के नहीं होने की तस्दीक़ की है। इसके बाद वादी पत्रकार ने 28 अक्तूबर 2015 जमानतदारों के फर्जी होने के सभी साक्ष्यों को कोर्ट में प्रस्तुत कर आरोपी शिक्षक मदनमोहन ठाकुर की जमानत तोड़ देने का आवेदन दिया तो आरोपी मदनमोहन ठाकुर के वकील एन. के. बंसल ने कोर्ट से पत्रकार के आवेदन पर जवाब दाखिल करने के लिए समय मांग लिया
आरोपी शिक्षक मदनमोहन ठाकुर 6 जनवरी 2016 को कोर्ट में उपस्थित हुआ तथा अपने वकील एन. के. बंसल के माध्यम से पत्रकार के आवेदन का जवाब दाखिल किया। अपने जवाब में मदनमोहन ठाकुर ने यह स्वीकार किया कि उसने अपनी जमानत के लिए अपने जान-पहचान के ब्रजपाल, निवासी जवाहर नगर, थाना कंकड़खेड़ा, मेरठ से दो जमानतदार उपलब्ध कराने के लिए कहा था तथा उसके कहने पर ही उसके जान-पहचान के ब्रजपाल ने ही उसके लिए दो जमानतदार उपलब्ध कराए थे। मदनमोहन ठाकुर ने कोर्ट में दाखिल अपने जवाब में यह भी बताया कि दोनों फर्जी जमानतदार उपलब्ध कराने वाले ब्रजपाल की 30 अप्रैल 2015 को मौत हो चुकी है। इसके बाद वादी पत्रकार ने जब ब्रजपाल के बारे में जानकारी जुटानी शुरू की तो पता चला कि वह मेरठ कचहरी में रहते हुए जमानत के फर्जी कागजात तैयार कराने के साथ ही फर्जी जमानतदार उपलब्ध कराने वाले गिरोह का सरगना भी था। ब्रजपाल के बारे में और जानकारी जुटाने पर यह भी पता चला कि वह जमानत के फर्जी कागजात तैयार कराने तथा फर्जी जमानतदार उपलब्ध कराने के मामले में वर्ष 2009 में ही अपने नौ साथियों के साथ जेल की हवा खा चुका है। ग़ाज़ियाबाद और हापुड़ पुलिस ने 29 मार्च 2009 को संयुक्त कार्रवाई करते हुए इस गैंग को जमानत के फर्जी कागजात तथा मुहर के साथ गिरफ्तार किया था। यहां यह बताना ज़रूरी है कि जिस ब्रजपाल को ग़ाज़ियाबाद और हापुड़ पुलिस ने मार्च 2009 में गिरफ्तार किया था, उसी से आरोपी मदनमोहन ठाकुर ने सितंबर 2014 में अपनी जमानत के लिए दो जमानतदार उपलब्ध कराने के लिए कहा था तथा उसके ही द्वारा उपलब्ध फर्जी जमानतदारों को कोर्ट में पेश कर उसने अपनी जमानत कराई थी।

यहां यह भी बताना ज़रूरी है कि आरोपी शिक्षक मदनमोहन ठाकुर की ओर से कोर्ट में दाखिल किए गए जवाब में जहां-जहां ब्रजपाल का नाम आया है, वहां-वहां उसे मदनमोहन ठाकुर ने अपने जान-पहचान का बताया है। इससे यह स्पष्ट हो जाता है कि ब्रजपाल आरोपी मदनमोहन ठाकुर का बेहद करीबी था। आरोपी मदनमोहन ठाकुर ब्रजपाल के आपराधिक इतिहास को भलीभांति जानता था, तभी तो उसने समूचे मेरठ शहर में ब्रजपाल को ही अपनी जमानत के लिए दो जमानतदार उपलब्ध कराने के लिए कहा था। फिलहाल यह मामला मेरठ की एक अदालत में चल रहा है। आरोपी मदनमोहन ठाकुर ने फर्जी मेडिकल के सहारे कोर्ट को धोका देने का काम किया है। देखना है कि क़ानून के लंबे हाथ से बचने के लिए फर्जी जमानती गैंग का साथी मदनमोहन ठाकुर अब कौन सा ‘खेल’ खेलता है।