लागा चुनरी में दाग……!

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वर्ष 1963 में आई थी एक फिल्म ‘दिल ही तो है’। इस फिल्म का एक गाना है, ‘ लागा चुनरी में दाग छुपाऊं कैसे’…..। फिल्म में इस गाने का अर्थ जो भी रहा हो, लेकिन फिलहाल उत्तर प्रदेश की योगी सरकार पर यह गाना थोड़ा सा टि्वस्ट करके सटीक बैठ रहा है। बस इस गाने के बोल में इतना टि्वस्ट कर देना है कि ‘छुपाऊं कैसे’ के बाद ‘मिटाऊं कैसे’ कर देना है। यानी ‘लागा चुनरी में दाग, छुपाऊं कैसे, मिटाऊं कैसे, लागा चुनरी में दाग’….?
उन्नाव गैैंगरेप को लेकर उत्तर प्रदेश की योगी सरकार पर जो दाग लगा है, वह दाग कुछ दिनों तक हो सकता है, उनकी नज़र में अच्छा रहा हो। यदि ऐसा नहीं होता तो योगी सरकार इस घटना के लाइम लाइट में आते ही उसे कड़ाई से निपटने के लिए अपने मातहतों को संदेश देती। लेकिन ऐसा कुछ हुआ नहीं। यूपी सरकार एक तरह से आरोपी विधायक के बचाव में उतर आई और एक रणनीति के तहत मामले को नज़रअंदाज करने लगी। साथ ही मामले पर कुछ भी बोलने से परहेज करने लगी। योगी सरकार ने एकदम चुप्पी साध ली। यह ठीक वैसे ही, जैसे आस्ट्रेलिया में आंधी आने पर शुतुरमुर्ग करती है। अप्रैल 11 तक योगी सरकार शुतुरमुर्ग बनी रही। जब पानी नाक से ऊपर आ गया और उस पर आरोपी विधायक को बचाने का आरोप बुरी तरह चस्पा हो गया। देश की जनता यूपी की योगी सरकार और केन्द्र सरकार पर बुरी तरह हमलावर हो गई, उसकी किरकिरी होने लगी। इसके बाद भाजपा के केन्द्रीय नेतृत्व को यह समझ में आया कि उन्नाव कांड पर उसकी और यूपी की योगी सरकार की शुतुरमुर्गी चुप्पी पार्टी के लिए कितनी घातक साबित हुई है। अब पूरी-की-भाजपा डैमेज कंट्रोल में जुट गई। लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। पार्टी पर डेंट यानी दाग लग चुका था। अब इस दाग को धोने का प्रयास हो रहा है। उन्हें समझ में आ गया कि इस तरह के दाग अच्छे नहीं होते हैं। पर योगी सरकार पर उन्नाव कांड का यह दाग इस तरह चस्पा हो गया है कि यह उन्हें ताउम्र सालता रहेगा। उनके राजनीतिक जीवन की जब भी चर्चा होगी, उन्नाव कांड एक बदनुमा दाग की तरह उनके जीवन में चस्पा मिलेगा। वह न तो अब इस दाग को छुड़ा सकते हैं, न मिटा सकते हैं, न हटा सकते हैं और न ही छुपा सकते हैं। सर्फ एक्सल के अनगिनत पाउच खर्च करके भी वह यह नहीं कह सकते कि ‘दाग ढूंढते रह जाओगे।’ उन्हें तो अब फिल्म ‘दिल ही तो है’ का थोड़ा सा टि्वस्ट किया हुआ गाना ताहयात गुनगुनाना ही पड़ेगा, ‘लागा चुनरी में दाग छुपाऊं कैसे, मिटाऊं कैसे, लागा….?’