कोई न कोई चाहिए, प्यार….!

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विधायक जी अभी भी टनाटन हैं, जवान हैं। लेकिन उनकी पत्नी, नो कमेंट। किसी भी महिला पर वैसे भी कमेंट नहीं करना चाहिए। पर करें तो क्या करें। उन्होंने खुद ही उन्हें सामने लाकर लोगों को कुछ-न-कुछ कहने के लिए मजबूर कर दिया है। अब उन्होंने लोगों को मजबूर कर दिया है तो लोग कहेंगे ही।
वैसे तो उन्नाव रेप कांड को लेकर विधायक जी की पहले ही फजीहत हो रही थी। पर रही-सही कसर उन्होंने खुद ही पूरी कर दी। वो भी मीडिया के सामने अपनी पत्नी को लाकर। पत्नी के सामने आते ही विधायक जी की सारी पोल खुल गई। लोगों ने विधायक जी को पहले से ही देख रखा था। लोग अब उनकी पत्नी को देख रहे हैं। लोग अब कभी विधायक जी को देखते हैं तो कभी उनकी पत्नी को। कभी उनकी पत्नी को देखते हैं तो कभी विधायक जी को। ऐसा कई बार हुआ। ठीक वैसा ही हुआ, जैसा फिल्मों में देखा करते थे। ऐसा होते-होते सबकुछ गडमड होने लगा। आखिरकार लोग इस द्वंद्व से बड़ी मुश्किल से निकले। लोगों को अब समझ में आने लगा कि विधायक जी ने पिछले कई सालों से डिब्बे में धूल-धूसरित बंद पड़ी श्रीमतीजी को बाहर क्यों निकाला है? लोगों को समझ में आ गया कि जो महिला कभी घर की देहरी लांघने की हिमाकत नहीं कर सकती थी, वह महिला आज मीडिया के सामने आकर रूबरू कैसे खड़ी हो गई। यह ठीक उसी तरह से हुआ, जैसे कभी भाजपा के एक नेता ने अपनी पत्नी को आगे कर किया था।
याद नहीं है तो याद कीजिए मायावती और भाजपा नेता दयाशंकर सिंह के विवाद को। तब उन्होंने मायावती का सामना करने के लिए अपनी पत्नी को आगे कर दिया था। तब उनकी पत्नी भी काफी तेज-तर्रार साबित हुई थीं। अब की नहीं कह सकता। तब इस महिला ने अपने पति के व्यू से अपने को अलग कर मायावती का अच्छी तरह से मानमर्दन किया था। इस महिला के तेवर देख मायावती को भी बैकफुट पर आना पड़ा था। तब जनता ने भी इस महिला का खूब साथ दिया था। भाजपा नेता के उसी कारगर ‘अचूक तीर’ पर अमल करते हुए विधायक कुलदीप सिंह सेंगर ने भी उसी ‘तीर’ को आजमाने की कोशिश की है । पर उनकी यह रणनीति एकदम फेल हो गई। हुआ एकदम उल्टा। पत्नी के सामने आते ही लोगों को सारा माज़रा समझ में आ गया। लोग उनकी कुछ सुने बिना ही सबकुछ समझ गए। लोग समझ गए कि माननीय विधायक जी की उमर अभी कच्ची है। और जब उमर कच्ची होगी तो दिल तो बच्चा होगा ही। और दिल जब बच्चा होगा तो दिल खोलकर उन्हें गाने दीजिए, ‘कोई न कोई चाहिए, प्यार करनेवाला, कोई न कोई चाहिए मुझ पर मरने वाला।’ क्यों विधायक जी, सही कहा न।

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