सीजेआई के खिलाफ विपक्ष लामबंद, महाभियोग की तैयारी!

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नई दिल्ली : केन्द्र की मोदी सरकार और मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा के खिलाफ पूरा विपक्ष लामबंद है। मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस देने के साथ ही समूचा विपक्ष मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग लाने की तैयारी कर रहा है। इसके तहत कांग्रेस, राकांपा, वामदल के कुछ नेताओं ने महाभियोग के प्रस्ताव पर हस्ताक्षर भी कर दिया है। राकांपा के सांसद माजिद मैमन ने इसकी पुष्टि की है। मंगलवार की रात तक जरूरी 50 सांसदों के हस्ताक्षर लेकर बुधवार को ही राज्यसभा में नोटिस दिया जा सकता है। समूचा विपक्ष यदि अपने इस महाभियोग प्रस्ताव पर आगे बढ़ता है तो दीपक मिश्रा ऐसे पहले मुख्य न्यायाधीश होंंगे, जिनके खिलाफ यह प्रस्ताव आएगा।

गौरतलब है कि जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ वामदल पहले से ही लामबंद थे। ये दल तब से महाभियोग लाने की जुगत में थे, जब जनवरी में सुप्रीम कोर्ट के चार जजों ने उनकी कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे। लेकिन पिछले दो-तीन दिनों में संसद के अंदर विपक्ष ने इसे धार दिया है। कांग्रेस की ओर से इसकी शुरुआत की गई है। वकील प्रशांत भूषण ने इसका ड्राफ्ट तैयार किया है। सूत्रों के अनुसार राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद, कपिल सिब्बल, आनंद शर्मा, राकांपा के शरद पवार, प्रफुल्ल पटेल समेत कई नेताओं ने इस पर हस्ताक्षर कर दिए हैं।तृणमूल कांग्रेस को भी इसमें जोड़ने की कवायद चल रही है। इस ड्राफ्ट में जस्टिस दीपक मिश्रा पर कई आरोप लगाए गए हैं। इनमें प्रसाद एजुकेशन ट्रस्ट समेत कई राजनीतिक मुद्दे भी हैं। राम मंदिर और जस्टिस लोया की मौत का मामला भी इसमेंशामिल हैं। 

गौरतलब है कि महाभियोग प्रस्ताव के लिए लोकसभा में 100 और राज्यसभा में कम से कम 50 सदस्यों के हस्ताक्षर जरूरी है। सदन मेंवप्रस्ताव पास होने के बाद पीठासीन अधिकारी तीन जजों की समिति गठित करेंगे। इस समिति में सुप्रीम कोर्ट के एक न्यायाधीश, हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और एक किसी कानूनी जानकार होंगे। यह समिति सभी आरोपों की जांच करेगी। जांच में आरोप सही साबित होने पर सदन से प्रस्ताव पास किया जाएगा। प्रस्ताव पास हो जा ने के बाद राष्ट्रपति मुख्य न्यायाधीश को हटाने की कार्रवाई करेंगे। गौरतलब है कि मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा अक्टूबर में रिटायर हो रहे हैं।