सत्ता से दूरी भी बड़ी बुरी बीमारी!

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लगातार सत्तासुख भोगने वाले कांग्रेस के नेताओं को सत्ता से दूरी साल रही है। उन्हें यह दूरी अपच हो रही है। इस कारण सबसे पुरानी पार्टी के नेताओं को यह समझ में नहीं अा रहा है कि वे क्या करें? वे लगातार उलजलूल हरकत कर रहे हैं। कांग्रेस के इन नेताओंमें मणिशंकर अय्यर सबसे ऊपर हैं। उनके लिए सत्ता से दूरी सबसे अधिक कष्टकारक साबित हो रही है। वे सत्ता से दूर रहकर फ्रसट्रेट हो रहे हैं। इसी कारण वह मोदी और उनकी सरकार पर लगातार हमलावर हो रहे हैं। लेकिन, मणिशंकर अय्यर यह समझ नहीं पा रहे हैं कि उनकी इन हरकतों से कांग्रेस को हर बार नुकसान और मोदी को हर बार फायदा ही हो रहा है।

मणिशंकर अय्यर ने सबसे पहले वर्ष 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री उम्मीदवार बनने पर तंज किया था। उस समय उन्होंने नरेंद्र मोदी के बारे में दावा किया था कि वह इक्कीसवीं सदी में कभी भी प्रधानमंत्री नहीं बन सकते हैं। इसी के साथ उन्होंने यह भी कहा था कि वह चाहे तो कांग्रेस दफ्तर के आगे चाय बेच सकते हैं। इसके बाद वह पाकिस्तान जाकर मोदी सरकार को बेदखल करने के लिए वहां की सरकार से सहयोग मांगा था। बीते गुजरात विधानसभा चुनाव के दौरान भी मणिशंकर अय्यर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ ज़हर उगला थातथा उन्हें ‘नीच आदमी’ बताया था। मणिशंकर अय्यर के इन हरकतों से कांग्रेस को लगातार नुकसान ही हुआ है, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक चतुर नेता की तरह उनके इन बयानों को अपनेपक्ष में लगातार भुनाया है। यह सब जानते हुए भी मणिशंकर अय्यर चुप रहने को तैयार नहीं हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को नीचा दिखाने के लिए वह हर बार कुछ-न-कुुछ एेसा कर जाते हैं कि कांग्रेस को नुकसान ही होता है। यह सब जानते हुए भी वह एक बार फिर पाकिस्तान जाकर मोदी सरकार के खिलाफ बयानबाजी कर आए हैं। उनकी यह हरकत फिर से कांग्रेस को ‘काम लगाने’ में सहयोग करेगी। सच यह है कि मणिशंकर अय्यर सत्ता से दूर होकर फ्रसटेट हो गए हैं। वे समझ नहीं पा रहे हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर दिए गए उनके किसी बयान का क्या असर पड़ेगा? इसलिए कह सकते हैं कि ‘सत्ता से दूरी बहुत बड़ी बीमारी’ है। सता से दूर होकर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, कपिल सिब्बल और मणिशंकर अय्यर समेत कांग्रेस के तमाम नेता इसी बीमारी से पीड़ित हैं। मोदी पर दिए गए हर बयान उलटा पड़ने के बाद भी इन नेताओं को यह समझ नहीं आ रहा है कि उन्हें क्या बोलना चाहिए और क्या नहीं? उन्हें चुप रहना भी नहीं आता है। वे मोदी का तोड़ ढूंढने में लगातार नाकाम हैं। सत्ता से दूर होकर सभी नेता फ्रसटेट हो गए हैं, इसीलिए ये नेता लगातार वे सब करते जा रहे हैं, जो उनके और उनकी पार्टी के लिए नुकसानदायक है।