पदमावत : कांग्रेसियों, ये चुप्पी बड़ी बीमारी!

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नई दिल्ली। पदमावत फिल्म को लेकर देश में बड़ी हाय-तौबा मची है। राजपूतों की करणी सेना फिल्म को लेकर आगबबूला है। इस मसले पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आ चुका है। बावजूद इसके भारतीय जनता पार्टी हर स्थिति में करणी सेना का साथ दे रही है। उधर, कांग्रेस इस मसले पर गहरी चुप्पी साध रखी है। वह कुछ बोलने को तैयार ही नहीं है। चुप रहने से रोग का निदान संभव नहीं है। चुप्पी बहुुुत बड़़ी बीमारी है, यह उसे समझ में नहीं आ रही है।

पदमावति बाद में पदमावत फिल्म को लेकर पिछले एक साल से देश में हाय-तौबा मची हुई थी। इसको देखते हुए भाजपा शासित चार राज्यों गुजरात, राजस्थान, मध्यप्रदेश और हरियाणा ने इस फिल्म के प्रदर्शन पर रोक लगा दी थी। इसको लेकर फिल्म से जुड़े लोगों ने सुप्रीम कोर्ट में दस्तक दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस विवाद पर निर्णय देते हुए इस फिल्म के प्रदर्शन पर लगी रोक को हटाते हुए इसे पूरे देश में दिखाने का आदेश दिया था। इस आदेश के खिलाफ करणी सेना भी सुप्रीम कोर्ट गई। वहां उसकी याचिका खारिज हो गई। इसके बाद भी भाजपा शासित उन चारों राज्यों ने अपने तरीकों से करणी सेना का साथ दिया, जबकि कांग्रेस इस विवाद पर कुछ बोलने को तैयार नहीं है। सुप्रीम कोर्ट में जजों के विवाद पर प्रेस कांफ्रेंस करने वाली कांग्रेस इस मुद्दे पर गजब की चुप्पी साध रखी है। वह असमंजस में पड़ी हुई है। उसे समझ में नहीं आ रहा है कि वह इस मुद्दे पर किसका साथ दे। 

वोट खिसकने का डर दोनों दलों भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस दोनों को है। एक राजपूतों के वोट को अपने पक्ष में बनाए रखने के लिए करणी सेना का हर हाल में साथ दे रही है, जबकि दूसरी वोट खिसकने के डर से चुप्पी साध रखी है। वह दोनों हाथों में लड्डू लेकर चल रही है। उसे यह समझ में नहीं आ रही हैै कि चुप्पी बहुुुत बड़़ी बीमारी हैैै। चुप रहने से रोग का निदान संभव नहीं है। उसे एक पाले में आना ही होगा, अन्यथा ‘दुविधा में दोनों गए माया मिली न राम’ वाली कहावत चरितार्थ करती हुई नज़र आएगी।  

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