AAP के 20 विधायक अयोग्य घोषित

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नई दिल्ली : दिल्ली में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी को बड़ा झटका लगा है। राष्ट्रपति ने राष्ट्रीय निर्वाचन आयोग की  उस सिफारिश को मंजूरी दे दी है, जिसमें आप के बीस विधायकों को संंसदीय सचिव बनाकर लाभ का पद देेेेने का आरोप लगाते हुए उन्हें अयोग्य ठहराने के लिए कहा गया था। आप ने इस निर्णय पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे राजनीतिक साजिश करार दिया है, जबकि कांग्रेस और भाजपा ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के इस्तीफे की मांग की है।कांग्रेस ने जून 2016 में इन विधायकों के खिलाफ शिकायत की थी। इस शिकायत में आरोप था कि आम आदमी पार्टी के 21 विधायकों को दिल्ली सरकार के मंत्रियों का संसदीय सचिव नियुक्त किया गया है, जो कि संविधान का उल्लंघन है। इनमें से जरनैल सिंह, जो कि राजौरी गार्डन से विधायक थे, ने पंजाब विधानसभा का चुनाव लड़ने के लिए बाद दिल्ली विधानसभा से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद आप के बीस विधायकों को अयोग्य ठहराने के लिए राष्ट्रीय निर्वाचन आयोग में सुनवाई हुई। निर्वाचन आयोग की तरफ से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन सूत्रों का मानना है कि आयोग ने आप के बीस विधायकों को अयोग्य ठहराने की सिफारिश राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को भेज दी है। राष्ट्रपति ने चुनाव आयोग की सिफारिश को मंजूरी दे दी है। राष्ट्रपति के इस फैसले का असर जिन विधायकों पर पड़़ा है, उनमेंनअलका लांबा (चांदनी चौक), आदर्श शास्त्री (द्वारका), संजीव झा (बुराड़ी), राजेश गुप्ता (वजीरपुर), कैलाश गहलोत (नजफगढ़), विजेंदर गर्ग (राजिंदर नगर), प्रवीण कुमार (जंगपुरा), शरद कुमार (नरेला), मदन लाल खुफिया (कस्तूरबा नगर), शिव चरण गोयल (मोती नगर), सरिता सिंह (रोहतास नगर), नरेश यादव (मेहरौली), राजेश ऋषि (जनकपुरी), अनिल कुमार बाजपेयी (गांधीनगर), सोम दत्त (सदर बाजार), अवतार सिंह (कालकाजी), सुखवीर सिंह डाला (मुंडका), मनोज कुमार (कोंडली), नितिन त्यागी (लक्ष्मी नगर) और जरनैल सिंह (तिलक नगर) शामिल हैं। आप ने इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट जाने का ऐलान किया है।