…तो कांग्रेस के खाते में इतनी हार नहीं होती!

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नई दिल्ली। दूसरों को नीच बताने से यदि सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी कांग्रेस को लगातार जीत हासिल हो रही होती तो उसके खाते में इतनी हार नहीं होती। वह अजेय कहलाती। लेकिन, इतनी हार होने के बाद भी उसके नेता को यह समझ में नहीं आ रहा है कि उनकी लगातार हार क्यों हो रही है? उसके नेताओं के हालिया व्यवहार देखकर यही लगता है कि वे लगातार हो रही हार से दुखी नहीं हैं, बल्कि भारतीय जनता पार्टी और नरेंद्र मोदी को गरिया कर जीत का आनंद ले रहे हैं।

देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी कांग्रेस आजादी के बाद से ही यहां की सत्ता पर लगभग काबिज रही है। उसके नेताओं ने सत्ता के बिना जीना सीखा ही नहीं। अब लगातार हो रही हार सेे वे विचलित हो गए हैं। इस हार से कैसे उबरें, यह उन्हें समझ मेें नहीं आ रहा है। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में करारी पराजय के बाद वे चुनावों में जीत के लिए हर टोटके आजमा चुकेे हैं, लेकिन कामयाबी दूर की कौड़ी साबित हो रही है। उत्तर प्रदेेेेश विधानसभा चुनाव में ’28 साल यूपी बेहाल’ का नारा देेेेतेेे-देते साइकिल की सवारी कर ली। इसके बाद भी हार हो गई। गुजरात चुनाव आया तो खुद ही धर्म और जाति की राजनीति शुरू कर दी। रही-सही कसर मणिशंकर अय्यर ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को ‘नीच आदमी’ कहकर पूूूरी कर दी। यहां भी हार हो गई। अब कर्नाटक में चुनाव होने वाला है। कांग्रेस के नेता राहुल गांधी को राम और नरेन्द्र मोदी को रावण तथा अपनी पार्टी कांग्रेस को पाांडव और भारतीय जनता पार्टी को कौरव बता रहे हैं। कांग्रेस पार्टी के नेता भारतीय जनता पार्टी और उसके नेता नरेेंद्र मोदी को नीच बताकर देश की जनता को क्या बताना चाहते हैं, यह समझ सेे परे है। जनता उनकी इन हरकतों को लगातार देख रही है और इसकी सजा भी उन्हें दे रही है, बावजूद इसके वह अपनी ईर्ष्या त्यागने को तैयार नहीं हैं। वे भारतीय जनता पार्टी और उसके नेता नरेंद्र मोदी को लगातार नीच बताने में लगे हैं। उन्हेें यह समझ में नहीं आ रहा हैै कि किसी को नीच बताकर यदि जीत मिलती तो कांग्रेस पार्टी के खाते में इतनी हार नहीं होती।