….. तो ‘आप’ में ही लग गई ‘झाड़ू’!

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नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी पर आजकल यह कहावत ‘जो दूसरों के लिए गड्ढा खोदता है, वही उस गड्ढे में गिरता है’ सटीक बैठ रही है। उसने झाड़ू सिंबल इसलिए लिया था कि दूसरे दलों में झाड़ू लगाई जाए। अब हो रहा है इसका उल्टा। पहले तो आम आदमी पार्टी में एक-एक कर झाड़ू लग रही थी, ले किन अब तो थोक में

लगने लगी है। चुनाव आयोग द्वारा बीस विधायकों को अयोग्य घोषित करना इसी की परिणति है।

आम आदमी पार्टी का गठन वैकल्पिक राजनीति देने के लिए हुआ था तथा झाड़ू का सिंबल भी इसलिए लिया गया था कि दूसरी पार्टियों को झाड़ू लगाकर राजनीति से बाहर कर दिया जाए। लेकिन अब हो रहा है इसका उल्टा। पहले तो इक्का-दुक्का विधायक पार्टी से अलग हो रहे थे, लेकिन अब थोक में विधायक अयोग्य ठहरा दिए गए हैं। ये सब पार्टी के बड़े नेताओं के कारण हो रहा है। इन नेताओं ने लाभ पहुंचाने के लिए अपने बीस विधायकों को अपने बीस मंत्रियों के संसदीय सचिव बना दिए। नियमत: एेसा नहीं होना चाहिए था, क्योंकि दोनों लाभ के पद हैं। पर नियुक्ति कर दी गई। इसकी शिकायत राष्ट्रपति महोदय से की गई। उन्होंने इस मामले को जांच के लिए चुनाव आयोग के पास भेज दिया। वहां मामले की सुुनवाई हुई। आप के विधायकों ने हठधर्मिता अपनाते हुए चुनाव आयोग के पास जाना उचित नहीं समझा तथा अपने वकीलों के माध्यय से अपना टपक्ष रखा। चुनाव आयोग ने कई बार बुलाया, लेकिन आप के विधायक अपना पक्ष रखने नहीं गए। आखिरकार चुनाव आयोग ने आप के बीस विधायकों के अयोग्य करने की संस्तुति राष्ट्रपति से कर दी। इसके खिलाफ आप विधायक हाईकोर्ट भी गए, परन्तु वहां भी राहत नहीं मिली। अब आम आदमी पार्टी के बीस विधायकों पर झाड़ू फिरना तय है। सही है जो दूसरों के लिए गड्ढा खोदता है, वही उस गड्ढे में गिरता है। इन लोगों ने दूसरीपार्टियों में झाड़ू लगाने का मन बनाया था, अपनी पार्टी में ही झाड़ू लग गई।