इस तरह तो नहीं जीत पाएंगे कर्नाटक!

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नई दिल्ली। वर्ष 2018 में होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर कांग्रेस सिंसियर नहीं लग रही है, जबकि भारतीय जनता पार्टी हर समय चुनाव के मोड में ही नजर आती है। गुजरात विधानसभा चुनाव के खत्म होने के साथ ही वह इस साल होने वाले विधानसभा चुनावों की तैयारी में जुट गई है। भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह इन चुनावों की तैयारी को लेेेेकर बीते दस दिनों में दो बार कर्नाटक का दौरा कर चुके हैं, जबकि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी विदेश जाकर भारत केे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को कोसने में लगे हैं। राहुल गांधी की इस गैैैर रणनीतिक सक्रियता को देेखकर यही लग रहा है कि वहां भी हिमाचल होने जा रहा है।

इस साल कर्नाटक समेत कई राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाला है। कर्नाटक में फिलहाल कांग्रेस की सरकार है। लेकिन कांग्रेस के मोड को देखकर एेसा नहीं लगता है कि वह कर्नाटक विधानसभा चुनाव को लेकर सिंसियर है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी बहरीन जाकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को कोसने में लगे हैं। वह वहां पर प्रधानमंत्री मोदी और उनकी पार्टी भाजपा पर देश में जातीय भेदभाव पैदा करने का आरोप लगा रहे हैं, जबकि पूरा देश जानता है कि गुजरात चुनाव में पटेल, पिछड़ों और दलितों की राजनीति किसने की थी। उधर, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह पिछले दस दिनों में कर्नाटक का दो बार दौरा कर चुके हैं। उनकी इस व्यस्तता को देखकर यह पता चलता है कि वह कर्नाटक विधानसभा चुनाव जीतने के लिए कितने बेकरार हैं। वह पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ-साथ वहां के विधायकों और सांसदों के साथ भी जीत को लेकर मंथन कर चुके हैं, जबकि सत्तारूढ़ कांग्रेस के 

राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी विदेश में हैं। कर्नाटक विधानसभा चुनाव को लेकर न तो उनके पास फिलहाल कोई नीति है और न ही कोई तैयारी है। उनके इस रवैये को देखकर यह लग रहा है कि वह कर्नाटक विधानसभा चुनाव को लेकर कतई सिंसियर नहीं हैं। पार्टी के अन्य नेता भी सक्रिय नहीं दिख रहे हैं। राहुल गांधी और उनकी पार्टी के नेताओं की शारीरिक और मानसिक सक्रियता को देखकर यह लग रहा है कि कर्नाटक में भी हिमाचल में हुई चुनावी घटना की पुनरावृति ही होगी।

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