सल्तनत बचाने की छटपटाहट

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दो मास्टर स्ट्रोक्स से मुस्लिम धर्म गुरुओं में भारी छटपटाहट है। वे प्रधानमंत्री मोदी के इन दो सुधारों तीन तलाक बिल और हज पर जाने वाली महिलाओं को महरम से आज़ादी से इतने आहत हैं कि उन्हें लगता है कि उनकी चौदह सौ साल पुरानी सल्तनत बिखर गई है। वे चौदह सौ साल पुरानी अपनी सल्तनत को बचाने के लिए आखिरी लड़ाई लड़ रहे हैं। उधर, मुस्लिम महिलाएं अपने पक्ष में आए इन बदलावों को लेकर काफी खुश हैं। उन्हें उम्मीद है कि मुस्लिम समाज की अन्य कुरीतियों जैसे चार शादियां और हलाला आदि को भी मोदी सरकार डस्टबिन में फेंक देगी।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पहले तो तीन तलाक बिल लोकसभा में पास करवाकर मुस्लिम महिलाओं को एक तोहफा दिया। इसके बाद साल के अंतिम दिन महरम के बगैर मुस्लिम महिलाओं को हज पर जाने की इजाजत देकर उन्हें अपने दम पर वह सबकुछ करने की आजादी दे दी, जिन्हें वे अब तक नहीं कर पा रही थीं। उधर, मोदी सरकार के इन दो मास्टर स्ट्रोक्स से मुस्लिम धर्म गुरुओं में भारी नाराजगी है। वे इसे शरियत में हस्तक्षेप मानकर इन दोनों सुधारों का विरोध कर रहे हैं। जबकि सच्चाई यह है कि वे अपनी चौदह सौ साल पुरानी सल्तनत को बचाने के लिए आखिरी लड़ाई लड़ रहे हैं। वे नहीं चाहते कि उनके समाज की महिलाएं अपने दम पर कुछ भी हासिल कर सके। यदि मुस्लिम महिलाएं अपने दम पर सबकुछ पाने लगेंगी तो उन मर्दों का क्या होगा, जो अब तक उन्हें अपने हाथों का खिलौना बनाकर रखे हुए थे तथा जब तब अपनी मनमानी करते थे। मोदी सरकार के इन दो सुधारों ने मुस्लिम समाज के उस ताने-बाने को छिन्न-भिन्न कर दिया है, जिनसे डराकर मुस्लिम धर्म गुरू अभी तक मुस्लिम महिलाओं को एक तरह से बंधक बनाकर रख रहे थे। मोदी सरकार ने इन दो सुधारों को लागू कर मुस्लिम महिलाओं को आसमान में उड़ान भरने की आजादी दे दी है, जिनसे वे अभी तक वंचित थीं। उधर, मुस्लिम समाज के पुरुष अपनी बिखरती हुई सल्तनत को बचाने के लिए आखिरी लड़ाई लड़ रहे हैं। यह छटपटाहट कारगर नहीं होगी।