कौन-कितना मजबूत, कर्नाटक बताएगा

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गुजरात विधान सभा चुनाव सम्पन्न हो गया है। अब आम आदमी से लेकर पत्रकार तथा राजनीति से जुड़े लोग अपने निहितार्थ लेख लिख रहे हैं और बयानबाजी कर रहे हैं। कांग्रेस से जुड़े लोग गुजरात चुनाव के बाद कांग्रेस को मजबूत होते देख रहे हैं, जबकि भारतीय जनता पार्टी को कमजोर होने के संकेत दे रहे हैं। इस मुद्दे पर मेरा नजरिया इसके उलट है। सच तो यह है कि कांग्रेस गुजराती तिकड़ी के सहारे कुछ सीटें अधिक जरूर पा ली है, पर वह मजबूत नहीं है। वैसे भी कांग्रेस कितनी मजबूत हुई है, कर्नाटक जरूर बता देगा।

 

गुजरात चुनाव के बाद कांग्रेस के कई नेता और उनके समर्थक पत्रकार तथा राजनीतिक विश्लेषक कांग्रेस के मजबूत होने तथा भारतीय जनता पार्टी के कमजोर होने का बयान दे रहे हैं। वे कांग्रेस को 80 सीट मिल जाने को उसकी मजबूती के संकेत दे रहे हैं, जबकि वस्तुस्तिथि इससे उलट है। गुजरात में कांग्रेस को 80 सीटें अपने दम पर नहीं मिली है। ये सीटें कांग्रेस को गुजरात की तिकड़़ी हार्दिक, अल्पेश और जिग्नेेश के सहयोग से मिली हैं। यह ठीक उसी तरह से है, जैसे बिहार के विधानसभा चुुनाव में कांग्रेस को 42 सीटें मिली थींं। वहां भी 42 सीटें राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और जदयू के नीतीश कुमार के दम पर मिली थीं। कांग्रेस अपने दम पर न तो बिहार में 42 सीटें पा सकती थी और न ही गुजरात में 80 सीटें जीत सकती थी। सच तो यह है कि कांग्रेस न तो मानसिक तौर पर मजबूत है और न ही सांगठनिक तौर पर मजबूत है। यदि एेसा नहीं है तो अगले साल कर्नाटक में होने वाले चुनाव में कांग्रेस कितनी मजबूत है, पता चल जाएगा।

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