जगन्नाथ मिश्रा के ‘सुख’ से दुखी हैं लालू

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दूसरे का सुख देखकर दुखी होने का भी कुछ अजीब ही मनोविग्यान है। देवघर चारा घोटाले में राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के जेल जाने के बाद वे और उनका कुनबा खुद के दुख से दुखी नहीं हैं। ये लोग जगन्नाथ मिश्रा के ‘सुख’ यानी देवघर चारा घोटाले में उनके बरी हो जाने से दुखी हैं। तेजस्वी यादव समेत उनके कुनबे तथा राजद के नेताओं का आरोप है कि पिछड़ी जाति के होने के कारण ही राजद सुप्रीमो को इस घोटाले में फंसाया गया है, जबकि अगड़ी जाति के होने के कारण जगन्नाथ मिश्रा को बरी कर दिया गया है। लालू प्रसाद यादव के कुनबे में आए ‘दूसरे के सुख से दुखी’ होने वाले मानसिक विकार का इलाज भी उन्हीं लोगों को तलाशना होगा, जो लोग इससे पीड़ित हैं।

राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद के बिहार (तब झारखंड भी बिहार का हिस्सा था ) के मुख्यमंत्री रहते समय पूरे राज्य में चारा घोटाला हुआ था। इसी दौरान भगवान शंकर की नगरी देवघर में भी 80 लाख रुपये का घोटाला हुआ था। बीते शनिवार को रांची की सीबीआई कोर्ट ने इसी मामले में लालू प्रसाद यादव को दोषी ठहराते हुए जेल भेज दिया था, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा को निर्दोष मानते हुए उन्हें बरी कर दिया था। कोर्ट के इस फैसले के बाद लालू प्रसाद यादव तथा उनके बेटे तेजस्वी यादव जाति की राजनीति करने लगे हैं। अगड़ों और पिछड़ों की राजनीति करते हुए राजद के नेता और लालू का कुनबा यह कह रहे हैं कि राजद सुप्रीमो को पिछड़ों की राजनीति करने के कारण सजा मिली है, जबकि जगन्नाथ मिश्रा को अगड़ी जाति के होने के कारण बरी कर दिया गया है। लालू प्रसाद यादव और उनके कुनबे का दर्द यह है कि जगन्नाथ मिश्रा को बरी क्यों किया गया है? लालू का कुनबा जगन्नाथ मिश्रा के बरी हो जाने यानी उनके सुख से दुखी है। लालू के कुनबे को दूसरे के सुख देख दुखी होने की बीमारी लग गई है। उन्हें इस मानसिक बीमारी से कोई और नहीं उबार सकता है़। उन्हें खुद ही इससे पार पाना होगा।