चाची को मूंछें होतीं तो चाचा कहता

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मेरठ : गुजरात विधान सभा चुनाव मेें हारकर भी जीत जाने की बात करने वाली कांग्रेस अब यह कहने लगी है कि यदि उसे 12-15 सीटें और मिल गई होतीं तो गुजरात में सरकार उसकी होती। कांग्रेस का यह सोचना लाजमी है। उसे यह सोचने का भी पूरा अधिकार है। आखिर खयाली पुलाव पकाने मेंं जाता क्या है। भाजपा विरोधी सभी दल भी कांग्रेस के इस सुर में सुर मिला रहे हैं। कांग्रेस समेत भाजपा विरोधी दलों की इस सोच पर कभी भाजपा के कद्दावर नेता रहे (अब कांग्रेस के) नवजोत सिहं सिद्धू का यह कहना ज्यादा समीचिन होगा कि मेरी चाची को मूंछें होतीं तो मैं उन्हें चाचा कहता।

कांग्रेस को गुजरात हार जाने का बड़ा ही मलाल है। उसके इस दर्द में भाजपा विरोधी अन्य दल भी शामिल हैं। इन दलों के नेताओं को यह लगता है कि कांग्रेस यदि थोड़ी सी मेहनत और कर ली होती तो गुजरात उसकी झोली में होती। कांग्रेस समेत इन दलों के नेताओं को यह समझ में नहीं आ रहा है कि यदि गुजराती तिकड़ी का सहारा नहीं मिलता तो कांग्रेस का क्या होता? सही बात तो यह कि यदि चुनाव में गुजराती तिकड़ी हार्दिक, अल्पेश और जिग्नेश का साथ कांग्रेस को नहीं मिलता तो उसकी सीटों की संख्या 2012 से भी कम होती। 

कांग्रेस के दो धुरंधर अर्जुन मोड़वाड़िया और भरत सिहं सोलंकी की इस चुनाव में जो दुर्गति हुई है, वह सबके सामने है। इसलिए कांग्रेस और गैर भाजपा दलों का यह कहना कि 12-15 सीटें और मिल जाती तो गुजरात में हमारी सरकार होती, दिन में सपना देखने के समान है। कांग्रेस नेता नवजोत सिहं सिद्धू का यह जुमला कि मेरी चाची को मूंछे होतीं तो मैं उन्हें चाचा कहता, ऐसे ही नेताओं पर फिट है।