मेजर नितिन लिथुल गोगोई ने प्रतिकूल परिस्थितियों में बुद्धि और साहस का परिचय दिया। तो उचित ही है कि भारतीय सेना ने उनका सम्मान किया है। इस सम्मान का संदेश दूरगामी है। इससे अलगाववाद और आंतरिक अशांति से निपटने के लिए तैनात सुरक्षा बलों का मनोबल बढ़ेगा। दूसरी तरफ अशांति फैलाने में शामिल तत्वों को पैगाम मिलेगा कि मानवाधिकार उल्लंघन का शोर मचाकर अब वे अपनी आपत्तिजनक गतिविधियों पर परदा नहीं डाल सकते।

जिस कार्य के लिए मेजर गोगोई को सम्मानित किया गया है, उसका महत्व उस पूरे घटनाक्रम पर गौर करते हुए ही समझा जा सकता है। पिछले दिनों श्रीनगर लोकसभा सीट पर उपचुनाव के दौरान जब पत्थरबाजों ने अफरा-तफरी मचा रखी थी, तब अपने कर्तव्य निर्वाह के लिए मेजर गोगोई ने अभिनव तरीका अपनाया। वो बहुचर्चित घटना पिछले 9 अप्रैल को घटी। तब करीब 500 पत्थरबाजों ने एक मतदान केंद्र पर आईटीबीपी और जम्मू-कश्मीर पुलिस के जवानों के साथ-साथ चुनाव अधिकारियों को भी घेर लिया था। ये सूचना मिलने पर बडगाम में तैनात राष्ट्रीय राइफल्स (सेना की एक इकाई) ने अपनी क्विक रिस्पॉन्स टीम भेजी। लेकिन पत्थरबाजों की भीड़ ने वहां रास्ता अवरुद्ध कर रखा था। सैन्य टुकड़ी पर भी पथराव किया जा रहा था। तभी मौके पर पहुंचने के लिए मेजर गोगोई ने एक तरीका सोचा। उन्होंने एक व्यक्ति को जीप की बोनट पर बांध दिया। इससे पत्थरबाजों के लिए पथराव करना मुश्किल हो गया, क्योंकि उससे उनके ही एक व्यक्ति के निशाने पर आने की हालत बन गई। आखिरकार पत्थरबाजों के बीच से सेना की पांच गाड़ियों का काफिला सुरक्षित निकल सका। इस अभियान के बाद जीप से बंधे 26 वर्षीय युवक को सैन्य दस्ते ने पुलिस को सौंप दिया। सेना ने कहा है कि मेजर गोगोई का ये कदम कई जिंदगियां बचाने में मददगार बना। तो अब गोगोई को चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ कॉमन्डेशन से नवाजा गया है।

स्पष्टत: यह एनडीए सरकार के कार्यकाल में अपनाई गई नीतियों की एक और झलक है। इसके तहत आंतरिक गड़बड़ी से निपटने में सुरक्षा बलों को पूरी आजादी मिली है। इससे वे मानवाधिकार हनन का आरोप लगने जैसी चिंताओं से मुक्त होकर कार्रवाई कर पा रहे हैं। ध्यानार्थ है कि युवक के सेना की जीप से बंधे होने की तस्वीर और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे। कुछ लोगों ने इस कदम की आलोचना की थी। घटना की जांच के आदेश भी दिए गए। लेकिन सेनाध्यक्ष जनरल बिपिन रावत ने अपने जम्मू-कश्मीर दौरे के समय मेजर गोगोई को यह सम्मान देकर ये साफ कर दिया कि सैन्य नेतृत्व उस घटना को किस नजरिए से देखता है। बेशक इस नए रुख से कश्मीर घाटी में हालात सुधारने में मदद मिलेगी। वहां सुरक्षा की भावना मजबूत होगी। बहरहाल, इसके साथ ही वहां के लोगों का भरोसा जीतने के प्रयास जारी रहने चाहिए। मकसद ऐसा समाधान निकालना है, जिसमें वहां के लोग सहभागी महसूस करें।