भारत में अक्सर हिंदी और अंग्रेजी की डिबेट चलती है और अंग्रेजी को बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण भी बताया जाता है। इस फिल्म के द्वारा उस डिबेट और एडमिशन की तरफ प्रकाश डालती हुई फिल्म है ‘हिंदी मीडियम’। कैसी बनी है यह फिल्म, आइए जानते हैं…

कहानी
यह कहानी राज बत्रा(इरफान) और मीता(सबा कमर) की है। दोनों शादीशुदा कपल है और दिल्ली में उनकी कपड़ों की दुकान है। राज अमीर तो है लेकिन उसकी एक ही समस्या है की उसका खुद का हाथ अंग्रेजी में तंग है। इस वजह से मीता बार-बार परेशान रहती है और चाहती है की उनकी बेटी पिया का अंग्रेजी मीडियम स्कूल में ही हो। इसके लिए सबसे पहले ये कपल चांदनी चौक से हाई सोसाइटी वसंत विहार में शिफ्ट होता है और बेटी के एडमिशन के लिए जुगत लड़ाने लगता है लेकिन पेरेंट्स के इंटरव्यू में कपल फेल हो जाता है। आखिरकार इनके पास गरीब कोटे के जरिए अपनी बेटी का एडमिशन कराने का ऑप्शन बचता है। जिसके लिए ये परिवार गरीब भी बन जाता है जहां इनकी मुलाकात श्याम (दीपक डोबरियाल) और उसके परिवार से होती है। कहानी में ट्विस्ट टर्न्स आते हैं और कहानी का अंत क्या होता है ये तो आपको फिल्म देखने के बाद ही पड़ा चलेगा।
डायरेक्शन
फिल्म का डायरेक्शन बहुत बढ़िया है साथ ही रियल लोकेशन की शूटिंग अच्छी है। सिनेमेटोग्राफी और ड्रोन कैमरा के शॉट्स भी बेहतरीन हैं। साकेत चौधरी के करियर की भी ये सबसे उम्दा फिल्म होने वाली है। फिल्म की कहानी काफी आसान है लेकिन उसमें कॉमेडी के एलिमेंट्स पिरोना और डायलॉग्स के साथ चेहरे पर बार-बार मुस्कान लाना, ये काम बहुत ही खूब दर्शाया गया है। फिल्म में कई सारे ऐसे पल आते हैं जो आपको अंत तक याद रह जाते हैं जैसे दीपक डोबरियाल का मच्छर और मकान मालिक वाला सीन, सबा कमर का पानी भरने वाला सीन, पिया का जेरी वाला सीन, इरफान का लास्ट में और समय-समय पर आने वाला कॉमेडी-सीरियस सीन्स। एक तरह से कॉमेडी ड्रामा हिंदी में बनी हुई फिल्मों में इस फिल्म का नाम भी लिया जाएगा और खास तौर पर हिंदी-अंग्रेजी के लिए होने वाली बहस पर भी बड़ा अंकुश लगाने का काम यह फिल्म करती है।
स्टारकास्ट की परफॉर्मेंस
इरफान खान ने एक बार फिर से यह साबित कर दिया है की आखिरकार उन्हें एक सम्पूर्ण एक्टर क्यों कहा जाता है। इरफान बहुत ही बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए नजर आए हैं, एक पिता और पति का किरदार बहुत सटीक निभाया है। सबा कमर ने बिल्कुल भी यह प्रतीत होने नहीं दिया की ये उनकी पहली हिंदी फिल्म है। वहीं दीपक डोबरियाल ने काफी सहज और उम्दा प्रदर्शन किया है और एक्टिंग की अलग अलग विधाओं को कैमरे के सामने पेश किया है। बाकी सभी कलाकारों का काम बढ़िया है।
फिल्म का म्यूजिक
फिल्म का म्यूजिक और बैकग्राउंड स्कोर अच्छा है और कहानी के संग संग चलता है। सचिन जिगर की जोड़ी ने बढ़िया संगीत दिया है और अमर मोहिले का बैकग्राउंड स्कोर बेहतरीन है।

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