ग्वालियर. दिन भर चिथड़ों में कबाड़ा-कचरा बीनने वाले टीनेजर रात को ब्रांडेड कपड़े, शूज़ और गैजेट्स के साथ निकलते थे। इनकी लाइफ-स्टाइल के बारे में जान पुलिस का माथा ठनका, देर रात नशे में देख इन्हें पकड़ कर पूछताछ हुई तो शहर की दर्जन भर चोरियों के राज उगल दिए।अफसर उस वक्त सन्न रह गए जब टीनेजर शातिरों ने बताया कि गश्त की कमियों का फायदा उठा कर वारदात के बाद ये कैसे सेफ निकल जाते थे। इलाके से एक बार गश्त कर वापस नहीं लौटती पुलिस….

– पॉश कॉलोनियों में कचरा-कबाड़ा बीन सूना और संपन्न घरों की तलाश कर टार्गेट फिक्स करने के बाद स्कूल ड्रॉप-आउट टीनेजर गैंग, टार्गेट इलाके की रैकी कर जानते थे कि पुलिस टीम के गश्त की टाइमिंग और पैटर्न क्या है।
– रैकी में इनका जो निष्कर्ष सामने आया उसे जान पुलिस की गश्ती टीम शर्मिंदा हो गई और अफसर सन्न रह गए। इस गैंग के 14 साल के मास्टरमाइंड ने बताया कि पुलिस टीम गश्त करते हुए एक बार जिस इलाके से गुजर जाती है उसी रात इलाके में दोबारा नहीं पहुंचती।
– इसका फायदा उठाकर इन शातिरों ने शहर भर में दर्जन भर घरों से कीमती सामान और जेवरात चोरी किए। पुलिस ने इनसे करीब 2 लाख से ज्यादा का माल बरामद किया है।
– इसके साथ ही गिरोह के कब्जे से 50 हजार रुपए के पुराने 500 के नोट मिले, जो बंद हो चुके हैं। यह नोट उन्होंने डीडी नगर में एक मकान से चोरी किए थे। नोट बंदी की समय सीमा खत्म होने के बाद पुराने नोट मिलना अपराध है। पुलिस मकान मालिक से भी पूछताछ करेगी।

 लाइफ स्टाइल ने पकड़वाए टीनएज शातिर
– पिछले कुछ दिन में महाराजपुरा सर्कल में काफी चोरी की वारदातें हो रही थीं। इस मामले में जांच कर रही पुलिस टीम को सूचना मिली कि कुछ लड़के दिन में कचरा-कबाड़ा बीनने का काम करते हैं, लेकिन शाम को वह मंहगे मोबाइल, जूते व कपड़े पहने देखे जाते हैं। उनकी लाइफ स्टाइल देख पुलिस को संदेह हुआ।
– पुलिस ने दीनदयाल नगर के 19 साल के अजय दिवाकर, 18 साल का रंजीत राणा, 18 साल के मनोज रजक, अजय रजक, बृजेन्द्र उनके दो नाबालिग साथियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की, शहर की करीब एक दर्जन चोरी की वारदात कबूल कर लीं।
नशे और IPL सट्टे में उड़ाते हैं चोरी की कमाई
– पकड़े गए गिरोह के सभी 6 सदस्य डीडी नगर व उसके आसपास के रहने वाले हैं। यह लोग दिन में कचरा-कबाड़ा बीनने का काम करते हैं। सभी स्कूल ड्रॉप-आउट हैं, इन्हें नशे की लत है। कबाड़े का काम करते-करते आपस में दोस्ती हुई, गिरोह बन गया।
– 14 साल का नाबालिग गिरोह का मास्टर माइंड है। यह दिन में कबाड़े का काम करते हुए सूना और संपन्न घर तलाशते थे। इसके बाद रात को वह तब तक वारदात नहीं करते थे, जब तक पुलिस गश्त इलाके से नहीं निकल जाए। एक बार पुलिस जवान वहां से गुजर जाएं तो पक्का हो जाता था कि पुलिस वापस नहीं आएगी। हालांकि नियमानुसार पुलिस को 2-3 राउंड लेना जरूरी होता है।
– चोरी का माल ये शातिर महंगी लाइफ स्टाइल, नशा और IPL पर सट्टा लगाने में खर्च करते थे।
जमीन में माल छिपा, ऊपर रोपते थे तुलसी का पौधा
– चोर गिरोह ने चोरी का पूरा माल घर के पास ज़मीन में दबा दिया था। ऊपर तुलसी का पौधा रोप दिया था, ताकि याद भी रहे और लोग शक भी न कर सकें।
– कुछ माल उनका एक साथी छतरपुर में अपने रिश्तेदार के घर भी इसी तरीके से छिपा कर आया था, और रिश्तेदार को इसकी भनक तक नहीं लगी थी।